प्रकाश का परावर्तन समतल दर्पण गोलीय दर्पण

Hello Science Lovers, आज के हमारे ब्लॉग का  शीर्षक है -प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light) ये सामान्य विज्ञान का एक हिस्सा जो Science gk के लिए अपलोड किया गया है।


प्रकाश (Light)


प्रकाश सूर्य से प्राप्त ऊर्जा है। जिसकी प्रकृति तरंग तथा कणीय दोनों प्रकार की होती है। प्रकाश की दोहरी प्रकृति के बारे में दी ब्रोगली ने बताया। प्रकाश का परावर्तन, अपवर्तन, विवर्तन आदि प्रकाश की तरंग प्रकृति के बारे में बताते है। जबकि प्रकाश का विद्युत- प्रभाव तथा कॉम्पटन प्रभाव प्रकाश की कणीय प्रकृति की व्याख्या करते है।

प्रकाश का तरंग सिद्धांत हाइजेन द्वारा दिया गया तथा थॉमस यंग ने प्रकाश के व्यतिकरण का सिद्धांत दिया।


फोटोन (Photon)


प्रकाश ऊर्जा छोटे-छोटे बंडलो के रूप में चलता है। जिसे फोटोन कहा जाता है। प्रकाश के फोटोन सिद्धांत के बारे में आइन्सटीन ने बताया था।


प्रकाश की किरण (Ray of light)


प्रकाश एक सीधी रेखा में चलता है। प्रकाश के इस पथ को ‘प्रकाश की किरण’ कहा जाता  हैं। विभिन्न प्रकार की छाया का बनना, सूर्य-ग्रहण चन्द्र-ग्रहण, परावर्तन, अपवर्तन, सूची-छिद्र कैमरा (Pin hole camera) से उलटे प्रतिबिंब का बनना आदि प्रकाश के सीधी रेखा में चलने के कारण होता है।


प्रकाश का परावर्तन (Reflection of light)


जब प्रकाश किरण किसी चिकने पृष्ठ से टकराकर वापस लौट आती है, तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

चाँदी प्रकाश का सबसे अच्छा परावर्तक है।


प्रकाश के परावर्तन के प्रकार


  1. नियमित परावर्तन (regular reflection)
  2. विसरित परावर्तन (irregular reflection)

नियमित परावर्तन (regular reflection)


इस प्रकार के परावर्तन में प्रकाश की किरणें किसी समतल चिकने परावर्तक पृष्ठ  (Reflective Surface)पर समानांतर दिशा में आपतित होती है। और परावर्तन के बाद भी परावर्तित किरणें समानांतर बनी रहती हैं समतल दर्पण प्रकाश का नियमित परावर्तन (regular reflection) करता है।


विसरित परावर्तन (irregular reflection)


इस प्रकार के परावर्तन में, प्रकाश की किरणें किसी टेढ़े-मेढ़े परावर्तक पृष्ठ  (Reflective Surface)पर समानांतर दिशा में आपतित होती है। और परावर्तन के बाद परावर्तित किरणें समानांतर न होकर अलग– अलग दिशाओं में परावर्तित होती है। जिसके कारण परावर्तित किरणें एक दुसरे के समानांतर नहीं होती हैं। इसे अनियमित परावर्तन (irregular reflection) भी कहते हैं। कार्डबोर्ड, मेज, कुर्सी, दीवारें, बिना पॉलिश की हुई धातु की वस्तुओं तथा गोलीय दर्पण द्वारा विसरित परावर्तन (irregular reflection) होता हैं।

प्रकाश का परावर्तन समतल दर्पण गोलीय दर्पण

समतल दर्पण


ऐसा दर्पण जिसका परावर्तक पृष्ठ (Reflective Surface)समतल होता है, समतल दर्पण कहलाता है। समतल दर्पण बनाने के काँच की शीट के पीछे तरफ चाँदी या पारे की पतली परत लगाई जाती है। चाँदी या पारे की इस परत को क्षय से बचाने के लिए पेंट से सुरक्षित किया जाता है।


प्रकाश के परावर्तन से संबंधित शब्दावली


आपतित किरण (Incident rays):  किसी दर्पण के परावर्तक सतह पर पड़ने वाली प्रकाश किरण को आपतित किरण कहा जाता है।

आपतन बिन्दु (Incident Point): किसी दर्पण के परावर्तक सतह वह बिन्दु जिस पर आपतित किरण पड़ती है, उसे आपतन बिन्दु कहा जाता है।

परावर्तित किरण (Reflective rays):  परावर्तन के वापस लौटने वाली प्रकाश किरण को परावर्तित किरण कहते हैं।

अभिलम्ब (Normal) :आपतन बिन्दु पर दर्पण के परावर्तक सतह के लंबवत समकोण बनती रेखा को अभिलम्ब कहते हैं।

आपतन कोण (Incident angle): आपतित किरण तथा अभिलम्ब बीच बना कोण आपतन कोण कहलाता है। इसे ∠i कहते है।

परावर्तन कोण (Reflective rays): परावर्तित किरण तथा अभिलम्ब बीच बना कोण परावर्तन कोण कहलाता है। इसे ∠r कहते है।


प्रकाश के परावर्तन के नियम (Laws of Reflection)


प्रथम नियम: इसके अनुसार आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं।

द्वितीयक नियम: इसके अनुसार, आपतन कोण का मान हमेशा परावर्तन कोण के बराबर होता है।

∠i = ∠r

पार्श्व व्युत्क्रम या पार्श्व परावर्तन (Lateral Inverse): – जब हम एक समतल दर्पण के सामने खड़े होते हैं तो दर्पण में बने प्रतिबिंब में हमारा दाहिना हिस्सा बायी ओर तथा बायाँ हिस्सा दायी ओर दिखाई देता इस परिघटना को पार्श्व व्युत्क्रम या पार्श्व परावर्तन कहते है।


समतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना


समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब की निम्न विशेषताए होती है। –

  1. प्रतिबिंब दर्पण के पीछे की ओर बनता है। प्रतिबिंब दर्पण से पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितना दर्पण के आगे की ओर वस्तु होती है।
  2. प्रतिबिंब आभासी (Virtual) और सीधा होता है।
  3. प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बराबर होता है।
  4. किसी वस्तु का समतल दर्पण में पूर्ण प्रतिबिंब देखने के लिए दर्पण की लम्बाई वस्तु की लम्बाई की कम से कम आधी होनी चाहिए।
  5. यदि दो समतल दर्पण एक दुसरे के θ कोण पर झुके हो तो उनके मध्य में रखी वस्तु के कुल प्रतिबिंब की संख्या होती है। उदाहरण के लिए यदि दो समतल दर्पण एक दुसरे से 90ºपर हो तो उनके बीच रखी वस्तु के 3 प्रतिबिंब बनेंगे।

समतल दर्पण का उपयोग

  • घरों में प्रतिबिंब देखने के लिए ।
  • परिदर्शी या पेरीस्कोप बनाने में।
  • बहुरूपदर्शी या कलेइडोस्कोप बनाने में।

गोलीय दर्पण (Spherical mirror)


ऐसा दर्पण जिसका परावर्तक पृष्ठ  (Reflective Surface)वक्रित (गोलीय) यानी मुड़ा हुआ होता है। गोलीय दर्पण कहलाता।

गोलीय दर्पण के प्रकार :

(i) अवतल दर्पण (Concave mirror) : इसका परावर्तक पृष्ठ  (Reflective Surface)अन्दर की ओर अर्थात गोले के केंद्र की ओर वक्रित  होता है। इसको याद करने रखने के लिए अ ध्यान रखे अ से अवतल अ से अंदर की ओर मुड़ा हुआ।

(ii) उत्तल दर्पण (convex mirror) : इसका परावर्तक पृष्ठ  (Reflective Surface)बाहर की तरफ उभरा हुआ होता है। इसको याद रखने के लिए उ से उभरा उ से उत्तल।

प्रकाश का परावर्तन समतल दर्पण गोलीय दर्पण


गोलीय दर्पण से संबंधित शब्दावली


(i) वक्रता केंद्र (Center of Curvature): गोलीय दर्पण का परावर्तक पृष्ठ  (Reflective Surface)जिस गोले का  भाग होता है। उसका केंद्र गोलीय दर्पण का वक्रता केंद्र कहलाता है। इसे C से दर्शाते है।

(ii) ध्रुव (Pole): गोलीय दर्पण के परावर्तक पृष्ठ  (Reflective Surface)के मध्य बिंदु को दर्पण का ध्रुव कहते है।  इसे P से दर्शाते है।

(iii) वक्रता त्रिज्या (The radius of Curvature): गोलीय दर्पण के ध्रुव (P) एवं वक्रता केंद्र (C) के बीच की दुरी को वक्रता त्रिज्या कहते है।

 (iv) मुख्य अक्ष (Principal axis): गोलीय दर्पण के ध्रुव(P) एवं वक्रता केंद्र(C) से होकर गुजरने वाली सीधी रेखा को दर्पण का मुख्य अक्ष कहा जाता है।

(v) मुख्य फोकस (Principal Focus): अवतल दर्पण के मुख्य अक्ष के समांतर आपतित किरणें परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के जिस बिंदु पर प्रतिच्छेद करती है। उसे अवतल दर्पण का मुख्य फोकस कहते है।

उत्तल  दर्पण के मुख्य अक्ष के समांतर आपतित किरणें परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष जिस बिंदु से अपसरित होती प्रतीत होती है। उसे उत्तल  दर्पण का मुख्य फोकस कहते है। इसे F से  दर्शाते है।

(vi) फोकस दुरी (Focal Length): दर्पण के ध्रुव (P) एवं मुख्य फोकस (F) के बीच की दुरी को फोकस दुरी कहते है। इसे f  से दर्शाते है। फोकस दुरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है।

R=2 f

(vii) द्वारक (Aperatute): गोलीय दर्पण की वृत्ताकार सीमा रेखा का व्यास दर्पण का द्वारक कहलाता है।


अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब  का बनना


अवतल दर्पण में निम्न प्रकार का प्रतिबिंब बनाता है। ।

जब वस्तु अनंत (infinity) पर हो

प्रकाश का परावर्तन समतल दर्पण गोलीय दर्पण

प्रतिबिंब मुख्य फोकस F पर बनता है।

प्रतिबिंब वास्तविक (Real) एवं उल्टा होता है।

प्रतिबिंब अत्यधिक छोटा बिंदु  के आकार का बनता है।


जब वस्तु वक्रता केंद्र C पर हो

प्रकाश का परावर्तन समतल दर्पण गोलीय दर्पण

प्रतिबिंब मुख्य फोकस F तथा वक्रता केंद्र C के बीच बनता है।

प्रतिबिंब वास्तविक (Real) एवं उल्टा होता है।

प्रतिबिंब छोटा बनता है।


जब वस्तु वक्रता केंद्र C पर हो

प्रकाश का परावर्तन समतल दर्पण गोलीय दर्पण

प्रतिबिंब वक्रता केंद्र C पर बनता है।

प्रतिबिंब वास्तविक (Real) एवं उल्टा होता है।

प्रतिबिंब बिंब के समान आकार का बनता है।


जब वस्तु वक्रता केंद्र C एवं मुख्य फोकस F के बीच हो

प्रकाश का परावर्तन समतल दर्पण गोलीय दर्पण

प्रतिबिंब C से परे बनता है।

प्रतिबिंब वास्तविक (Real) एवं उल्टा होता है।

प्रतिबिंब विवर्धित यानी बड़ा बनता है।


जब वस्तु मुख्य फोकस (F) पर हो

प्रकाश का परावर्तन समतल दर्पण गोलीय दर्पण

प्रतिबिंब अनंत (infinity) पर बनता है।

प्रतिबिंब वास्तविक (Real) एवं उल्टा होता है।

प्रतिबिंब अत्यधिक विवर्धित यानी बहुत बड़ा बनता है।


जब वस्तु ध्रुव (P) तथा मुख्य फोकस (F) के बीच हो

प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बनता है।

प्रतिबिंब आभासी (Virtual) एवं सीधा होता है।

प्रतिबिंब वस्तु से बड़ा बनता है।


अवतल दर्पण के उपयोग :

(i)  दंत विशेषज्ञ द्वारा मरीजों के दाँतों का बड़ा प्रतिबिंब देखने में।

(ii) शेविंग दर्पणों shaving mirrors) में ।

(iii) सौर भट्टियों में सूर्य के प्रकाश को में।

(iv) टॉर्च, सर्चलाइट तथा वाहनों के अग्रदीपों (headlights) में।


उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब  का बनना


जब वस्तु अनंत (infinity) पर हो

प्रकाश का परावर्तन समतल दर्पण गोलीय दर्पण

प्रतिबिंब मुख्य फोकस F पर बनता है।

प्रतिबिंब आभासी (Virtual) एवं सीधा होता है।

प्रतिबिंब अत्यधिक छोटा बिंदु  के आकार का बनता है।

जब वस्तु अनंत (infinity) तथा ध्रुव (P) के बीच हो

प्रकाश का परावर्तन समतल दर्पण गोलीय दर्पण

प्रतिबिंब ध्रुव (P) तथा मुख्य फोकस (F) के बीच बनता है।

प्रतिबिंब आभासी (Virtual) एवं सीधा होता है।

प्रतिबिंब वस्तु से छोटा बनता है।


उत्तल दर्पण का उपयोग :

(i) वाहनों के पीछे का दृश्य (wing) देखने वाले दर्पणों में।

(ii) वाहन के पार्श्व (side) में।

(iii) टेलिस्कोप में ।

(iv) स्ट्रीट लाइट में रिफ्लेक्टर के रूप में ।

गोलीय दर्पणों द्वारा परावर्तन केलिए चिह्न परिपाटी (Sign Convention):  

  1. गोलीय दर्पण के ध्रुव (P) को मूल बिंदु मानते है। और दर्पण की सभी दूरियां ध्रुव (P) से मापी जाती हैं ।
  2. बिंब को सदैव दर्पण के बाईं ओर रखा जाता है।
  3. मूल बिंदु के दाईं ओर की दूरियाँ + x-अक्ष के अनुदिश धनात्मक  मापी जाती है।
  4. मूल बिंदु के बाईं ओर दूरियाँ – x-अक्ष के अनुदिश ऋणात्मक मापी जाती है।
  5. दर्पण के मुख्य अक्ष के ऊपर के ओर की सभी दूरियाँ धनात्मक (+) ली जाती है।
  6. दर्पण के मुख्य अक्ष के नीचे की ओर की सभी दूरियाँ ऋणात्मक (-) ली जाती है।
प्रकाश का परावर्तन समतल दर्पण गोलीय दर्पण

दर्पण सूत्र (Mirror Formulla ):

बिंब दुरी : गोलीय दर्पण के सामने रखी वस्तु तथा इसके ध्रुव (P) के बीच की दूरी को बिंब दूरी कहते है। इसे u से दर्शाते हैं ।

प्रतिबिंब दुरी: गोलीय दर्पण के ध्रुव (P) और प्रतिबिंब के बीच की दूरी को प्रतिबिंब दूरी (v) कहते हैं । इसे v से दर्शाते हैं ।


आवर्धन या आवर्धन (Magnification): प्रतिबिंब की ऊँचाई तथा बिंब की ऊँचाई  का अनुपात है। आवर्धन  कहलाता है। इसे v से दर्शाते हैं

सीधे प्रतिबिंब के लिए प्रतिबिंब ऊँचाई (h’) धनात्मक (+) होती है। और उल्टे प्रतिबिंब के लिए प्रतिबिंब कि ऊँचाई (h’) ऋणात्मक (-) होती है। ।

यदि आवर्धन का मान धनात्मक मान होता है। तो प्रतिबिंब आभासी (Virtual) और सीधा होता है। और यदि  आवर्धन का मान ऋणात्मक मान  होता है। तो प्रतिबिंब वास्तविक (Real) और उल्टा  होता है।

बिंब दूरी (u) ऋणात्मक (-) होती है।

अवतल दर्पण की फोकस दुरी (f) का मान ऋणात्मक (-) होता है। जबकि उत्तल दर्पण की फोकस दूरी का मान धनात्मक (+) होता है।

प्रतिबिंब  दूरी (v) ऋणात्मक (-) होती  हैं यदि प्रतिबिंब वास्तविक (Real) तथा उल्टा बनता है। जबकि आभासी (Virtual) और सीधा प्रतिबिंब  के लिए प्रतिबिंब  दूरी  धनात्मक (+) होती है।

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प्रतिबिंब दो प्रकार की होती हैं– वास्तविक (Real) प्रतिबिंब और आभासी (Virtual) प्रतिबिंब

वास्तविक (Real) प्रतिबिंब: -ऐसा प्रतिबिंब जिसको पद्रे पर प्राप्त किया जा सकता है, वास्तविक (Real) प्रतिबिंब कहलाता है।

आभासी (Virtual) प्रतिबिंब:ऐसा प्रतिबिंब जिसको पद्रे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता है, आभासी (Virtual) प्रतिबिंब कहलाता  है।

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5 Comments
  1. Interessado em Desenvolvimento e Otimizações Web?

  2. badiya sir ji

  3. Trick accurate hai

  4. Bahut acha thanks

  5. Thank you very much

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