अधिगम का क्रिया-प्रसूत सिद्धांत

अधिगम का क्रिया-प्रसूत सिद्धांत (Operant Conditioning Theory of Learning)

यह सिद्धांत फेडरिक स्किनर (Burrhus Frederic Skinner) द्वारा दिया गया।

बी.एफ. स्किनर बीसवीं सदी के पहले मानव मौलिक व्यवहारवादी (Human fundamentalist behaviorist) थे।

स्किनर ने अपनी पुस्तक “टेक्नोलॉजी ऑफ टीचिंग (Techology of technology)” में ‘माइक्रो टीचिंग (Micro Teaching)’ तथा ‘अभिक्रमित अनुदेशन (Programmed Instruction)’ शब्द दिए।

 

स्किनर का चूहे पर प्रयोग (Skinner’s Experiment on Rat)

स्किनर ने सफेद चूहे पर अधिगम के प्रयोग किए। स्किनर में अपने प्रयोग के लिए एक बॉक्स का निर्माण करवाया। इस बॉक्स में घुमावदार मार्ग बनाये गये जिसमें चूहा दौड़ लगाता। इस बॉक्स में ऐसी अवस्था की गई की लीवर के दबने पर भोजन प्राप्त हो सके।

 

जब चूहा बॉक्स में विभिन्न मार्गो में दौड़ लगाता है तो अचानक उसका पैर लीवर पर पड़ता और लीवर दब जाता है। लीवर के दबने से उसको भोजन की प्राप्ति होती है।

अधिगम का क्रिया-प्रसूत सिद्धांत ( Operant Conditioning Theory of Learning)

चूहे का विभिन्न मार्गो से गुजरना एक अनुक्रिया (response) और उसे भोजन की प्राप्ति होना उद्दीपक (stimulate) तथा प्रोत्साहन है। इसलिए इसे अनुक्रिया उद्दीपक सिद्धांत (response-stimulus theory)  भी कहा जाता है।

इससे निष्कर्ष निकलता है कि क्रिया-प्रसुत व्यवहार (Operant behavior), उद्दीपक (stimulate) पर आधारित ना होकर अनुक्रिया (response) पर आधारित होता है।

यदि किसी क्रिया को करने के बाद कोई बल प्रदान करने वाला उद्दीपन मिलता है, तो अधिगम की शक्ति बढ़ जाती है। जैसे किसी विद्यार्थी को जब अंक प्राप्ति या किसी कार्य को करने पर ईनाम दिया जाता है, या प्रशंसा की जाती है। तो उसके कार्य करने की शक्ति में वृद्धि हो जाती है।

 

स्किनर का कबूतर पर प्रयोग (Skinner’s Experiment on Pigeon)

कबूतर पर प्रयोग के लिए स्किनर ने एक ऐसे बॉक्स का प्रयोग किया जिसमे कुंजी को दबाने से दाना प्राप्त हॉप सके कबूतर जब इस कुंजी पर चोंच मरता है। तो उसको दाने के प्राप्ति होती है।

 

क्रिया-प्रसूत सिद्धांत के अन्य नाम (Other Names of Theory Operant Conditioning)

  1. नैमेतिक सिद्धांत (Ethics theory)
  2. अनुकूलित-अनुक्रिया सिद्धांत (Conditioned Response Theory)
  3. अनुक्रिया-उद्दीपक सिद्धांत (Response-stimulate Theory)

 

सूक्ष्म शिक्षण (Micro-teaching)

एक शिक्षक अपनी पाठ्य पुस्तक को छोटे-छोटे खण्डो में बांट कर प्रस्तुत करता है तथा प्रत्येक खंड की समाप्ति के बाद आवश्यक पुनर्बलन (Reinforcement) देता है।

 

अभिक्रमित अनुदेशन (Programmed learning)

इसके अंतर्गत शिक्षक शिक्षण प्रक्रिया में शिक्षण मशीनों एवं विभिन्न सहायक शिक्षण साधनों का उपयोग करता है।

 

स्किनर के अभिक्रमित अनुदेशन (क्रमादेशित निर्देश) में निम्न घटक शामिल हैं-

  1. व्यवहारिक उद्देश्य (Behavioral objectives)
  2. अनुदेशन के छोटे-खण्ड, सूक्ष्म शिक्षण (Small frames of instruction)
  3. स्व- पदानियमन (Self-pacing)
  4.  प्रश्न पर शिक्षार्थी की सक्रिय प्रतिक्रिया (Active learner response to the inserted question)
  5. तत्काल प्रतिक्रिया(Immediate feedback)

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